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किसान आंदोलन में शरजील इमाम का पोस्टर, तोमर बोले- ये किसानों से जुड़ा मुद्दा तो नहीं

किसान आंदोलन में शरजील इमाम का पोस्टर, तोमर बोले- ये किसानों से जुड़ा मुद्दा तो नहीं

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने टिकरी बॉर्डर पर शरजील इमाम के पोस्टर का मसला उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि एमएसपी, एपीएमसी और अन्य मुद्दे किसानों से संबंधित हैं, लेकिन ये पोस्टर किसान का मुद्दा कैसे हो सकते हैं.

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन 16वें दिन जारी है. इस बीच टिकरी बॉर्डर पर राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार शरजील इमाम, उमर खालिद समेत कई आरोपियों के पोस्टर और उनकी रिहाई की मांग की तस्वीर वायरल हो रही है. कुछ किसान नेताओं का कहना है कि इन्हें रिहा किया जाना चाहिए. केंद्र सरकार ने किसानों के इस मांग पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने टिकरी बॉर्डर पर शरजील इमाम के पोस्टर का मसला उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि एमएसपी, एपीएमसी और अन्य मुद्दे किसानों से संबंधित हैं, लेकिन ये पोस्टर किसान का मुद्दा कैसे हो सकते हैं. यह खतरनाक है और यूनियनों को इससे खुद को दूर रखना चाहिए. यह सिर्फ मुद्दों को हटाने और विचलित करने के लिए है.

क्या है पूरा विवाद
दरअसल, किसान आंदोलन के बीच गुरुवार को मानवाधिकार दिवस के मौके पर टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन किया गया. इस दौरान किसानों के मंच पर एक पोस्टर लगाया गया, जिसमें उमर खालिद, शरजील इमाम, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवरा राव समेत अन्य लोगों की रिहाई की मांग की गई थी.

आरोप लगाया गया है कि इन सभी को झूठे केसों में अंदर डाला गया है, ऐसे में सरकार को इन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए. हालांकि, अन्य किसान नेताओं ने इस पोस्टर की जानकारी होने से इनकार किया. वहीं, भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के नेता झंडा सिंह का कहना है कि ये सिर्फ हमारे संगठन की ओर से पोस्टर लगाए गए थे. ये सभी बुद्धिजीवी हैं और हमारी मांग है कि जिन बुद्धिजीवियों को जेल में डाला गया है, उन्हें रिहा किया जाए.

बाइडन और कमला हैरिस को टाइम मैगजीन ने बनाया ‘पर्सन ऑफ द ईयर’

बाइडन और कमला हैरिस को टाइम मैगजीन ने बनाया ‘पर्सन ऑफ द ईयर’

साल 2020 के लिए टाइम मैगजीन ने अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन और उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस को ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ चुना है. बाइडन ने ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव में बड़े अंतर से हराया है.

टाइम मैगजीन ने अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन और उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस को साल 2020 के लिए ‘पर्सन ऑफ द ईयर‘ घोषित किया है.

समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन और कमला हैरिस ‘टाइम पर्सन ऑफ द ईयर’ चुने गए हैं. जो बाइडन ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को भारी मतों से हराया है. वहीं, कमला हैरिस अमेरिका की पहली अश्वेत और पहली दक्षिण एशियाई उप-राष्ट्रपति चुनी गई हैं. पिछले साल, पर्यावरण ऐक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग को इस टाइटल से नवाजा गया था. वहीं, साल 2016 में मैगजीन ने डोनाल्ड ट्रंप को ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ चुना था.

टाइम मैगजीन ने जो बाइडन और कमला हैरिस की तस्वीरों को अपनी कवर फोटो बनाया है. मैगजीन ने फोटो के साथ ‘Changing America’s story’ टाइटल दिया है. 78 वर्षीय बाइडन को राष्ट्रपति चुनाव में 306 इलेक्टोरल वोट हासिल हुए थे जबकि ट्रंप को सिर्फ 232 इलेक्टोरल वोट मिले थे.

टाइम मैगजीन ने कमला हैरिस और जो बाइडन के ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ चुने जाने को लेकर लिखा, “अमेरिका की कहानी को बदलने के लिए, मतभेद के बजाय सहानुभूति को ज्यादा बड़ी ताकत साबित करने के लिए और मुश्किल वक्त से गुजर रही दुनिया को एक विजन देने के लिए.”

जो बाइडेन और कमला हैरिस के अलावा, इस टाइटल के तीन और दावेदार थे जो फाइनल तक पहुंचे थे. इनमें हेल्थ केयर वर्कर्स, अमेरिका के महामारी एक्सपर्ट्स एथंनी फाउची और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप थे.

कोविड-10 महामारी के दौरान अपनी जान को जोखिम में डालने वाले नर्स, डॉक्टर्स, डिलीवरी ब्वॉय समेत तमाम वर्कर्स ने TIME Person of the Year Reader Poll जीता है. टाइम मैगजीन ने कहा कि इस साल हुए मतदान में कुल 80 लाख वोट पड़े जिनमें से 6.5 फीसदी वोट इन हीरोज को मिले.

टाइम मैगजीन ने अपने पाठकों से साल 2020 में सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ने वाले किसी व्यक्ति या समूह को चुनने के लिए कहा था. हेल्थ वर्कर्स और सेवा क्षेत्र में काम कर रहे लोग बाकी 80 उम्मीदवारों से आगे निकल गए थे. इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग और पोप फ्रांसिस समेत हस्तियां भी शामिल थीं.

किसान आंदोलन से बढ़ी दुष्यंत की चिंता, क्या अब खट्टर सरकार की बढ़ेगी टेंशन?

किसान आंदोलन से बढ़ी दुष्यंत की चिंता, क्या अब खट्टर सरकार की बढ़ेगी टेंशन?

कृषि कानूनों को लेकर किसानों की बढ़ती नाराजगी और सरकार के साथ समझौता न होने के चलते हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार को समर्थन करने वाली जेजेपी की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. जेजेपी ने किसान मुद्दे पर अब बीजेपी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है, जो खट्टर सरकार के लिए भी टेंशन का सबब बन गया है. 

नए कृषि कानूनों के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसान झुकने को तैयार नहीं हैं. तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसानों ने अपने आंदोलन की धार को और भी तेज कर दिया है. किसानों की बढ़ती नाराजगी और सरकार के साथ समझौता न होने के चलते हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार को समर्थन करने वाली जेजेपी की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. जेजेपी ने किसान मुद्दे पर अब बीजेपी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है, जो खट्टर सरकार के लिए भी टेंशन का सबब बन गया है.

किसान अपनी मांगों से किसी भी सूरत में पीछे हटने को तैयार नहीं है. ऐसे में हरियाणा में बीजेपी की सहयोगी दुष्यंत चौटाला जेजेपी में भी कृषि कानूनों को लेकर हरियाणा में सरकार से अलग होने की मांग पार्टी और किसान संगठनों की ओर से तेज होने लगी है. दुष्यंत चौटाला ने हाल ही में किसान मुद्दे पर अपने पार्टी विधायकों के साथ बैठक की थी. इस बैठक में पार्टी विधायकों से किसान आंदोलन का उनके क्षेत्र में असर, राज्यों को लोगों के रुख आदि के बारे में फीडबैक लिया गया.

हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने उम्मीद जतायी कि किसान अब अपना आंदोलन समाप्त कर देंगे, क्योंकि सरकार ने एमएसपी और अन्य मांगों पर लिखित में आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान समझेंगे कि जब केंद्र ने लिखित में आश्वासन दिया है तो यह उनके संघर्ष की जीत है. राज्य में बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार से हटने के लिए विपक्ष और हरियाणा के कुछ किसानों की ओर से दबाव का सामना कर रहे चौटाला ने कहा कि अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को खतरा होगा तो वह इस्तीफा दे देंगे. दुष्यंत चौटाला ने कहा कि मैं सबसे पहले किसान हूं, क्या मैं इससे इनकार कर सकता हूं.

कांग्रेस बना रही जेजेपी पर दबाव 

दरअसल, हरियाणा के कांग्रेस नेता और किसान आंदोलन के पक्ष में खड़े हुए हैं. प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा से लेकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसानों आंदोलन के बीच पहुंचकर समर्थन दे रहे हैं. दीपेंद्र हुड्डा ने कहा है कि दुर्भाग्य है कि किसानों को अपनी जायज मांग के लिए इतना लंबा संघर्ष करना पड़ रहा है. इसके बावजूद किसानों के हौसले बुलंद हैं. वो देश किसान के साथ हैं, लेकिन जेजेपी सत्ता और कुर्सी के लिए किसानों के खिलाफ बीजेपी के साथ खड़ी है.

जेजेपी के विधायक किसानों के साथ 

किसानों की बढ़ती नाराजगी के चलते जेजेपी के 10 विधायकों में से आधे किसान आंदोलन के साथ खड़े हैं. इनमें बरवाला से जोगीराम सिहाग, शाहबाद से रामकरण काला, गुहला चीका से ईश्वर सिंह, नारनौंद से राम कुमार गौतम और जुलाना से अमरजीत ढांडा किसानों के समर्थन में हैं. जेजेपी के वरिष्ठ नेता और विधायक राम कुमार गौतम ने नए कृषि कानूनों को रद्द करने को लेकर केंद्र से अनुरोध करने के लिए एक प्रस्ताव लाने के जरिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर दी है. यही वजह है कि दुष्यंत चौटाला पर दबाव बढ़ गया है.

हालांकि, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि जेजेपी के साथ हमारा गठबंधन मजबूत है. कहीं से भी कोई समस्या नहीं है. पिछले एक साल में हमने जो काम किया है, उससे अगले चार साल में विकास कार्यों में तेजी आएगी. हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार उन किसानों के साथ नरमी से पेश आएगी, जिन पर पिछले महीने हरियाणा पुलिस ने मामला दर्ज किया था. किसान हमारे अपने हैं, जो अपने होते हैं उनके साथ सारी चीजें ठीक होती हैं.

हरियाणा के समीकरण

बता दें कि हरियाणा में 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा सकी थी, लेकिन उसने दुष्यंत चौटाला की जेजेपी 10 विधायकों के समर्थन से हरियाणा में सरकार बना ली. इसके अलावा 5 निर्दलीय विधायक भी साथ आए थे. जेजेपी को ग्रामीण इलाको में वोट मिला था जो किसान मजदूरों का वर्ग माना जा रहा है. किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं.

वहीं, कांग्रेस के 31 विधायक हैं और उन्हें चार निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल हैं. इसके अलावा 1 इनेलो, 1 एचएलपी और दो निर्दलीय विधायक उनके साथ हैं. हालांकि, किसानों के मुद्दे पर जेजेपी के 6 विधायक जिस तरह से बागी रुख अपनाए हुए हैं. इस तरह से अब किसान आंदोलन की रफ्तार और तेजी होती है तो जेजेपी ही नहीं खट्टर सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा कह चुकी हैं कि किसानों के मुद्दे पर मनोहर लाल खट्टर सरकार की मनमानी और केंद्र की सख्ती के चलते हुए जेजेपी और निर्दलीय विधायक को सरकार से समर्थन वापस लेकर किसानों के साथ खड़े होने के लिए फैसला करना चाहिए.

“बाहरी” पर ममता को गवर्नर की चेतावनी – आग से न खेलें मुख्यमंत्री

“बाहरी” पर ममता को गवर्नर की चेतावनी – आग से न खेलें मुख्यमंत्री

पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था के मसले पर शुक्रवार को राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. ममता बनर्जी के ‘बाहरी’ वाले कमेंट पर राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री आग से ना खेलें.

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक तकरार और कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. राज्यपाल ने राज्य की कानून व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की और कहा कि बंगाल में विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं बची है.

बंगाल के राज्यपाल ने सीएम से सवाल किया कि राज्य में कौन बाहरी है, उनका इससे क्या मतलब है? क्या भारतीय नागरिक भी बाहरी हैं, ममता को इस तरह बयान नहीं देने चाहिए, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को आग से नहीं खेलना चाहिए. मुख्यमंत्री को संविधान का पालन करना चाहिए. 

बंगाल गवर्नर ने कहा कि संविधान की आत्मा का ध्यान रखें, भारत एक है उसका नागरिक है. अगर आप इस रास्ते से भटकती हैं, तब मेरे दायित्व की शुरुआत होती है. बंगाल के राज्यपाल ने कहा कि कल की घटना को लेकर मैंने राज्य के डीजीपी, चीफ सेक्रेटरी को तलब किया. कल चीफ सेक्रेटरी ने मुझे संदेश भेजा था कि उन्होंने राजनीतिक दौरे को लेकर डीजीपी को अलर्ट किया है.

डीजीपी, चीफ सेक्रेटरी ने नहीं सौपी रिपोर्ट
जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्होंने कल की घटना को लेकर डीजीपी, चीफ सेक्रेटरी से बात की और दुख जताया. डीजीपी, चीफ सक्रेटरी मेरे पास बिना किसी रिपोर्ट या इनपुट लिए हुए है, जबकि मैंने लिखित में आदेश दिया था. क्या राज्य की पुलिस ‘राजनीतिक पुलिस’ हो गई है. राज्य के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, सिर्फ भ्रष्टाचार चल रहा है. सरकारी तंत्र का राजनीतिक तंत्र हो गया है और विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं है.

राज्यपाल ने कहा कि बंगाल में इस वक्त ऐसे हालात हैं कि किसी विपक्ष के लिए जगह नहीं है. सत्ता दल से अलग कोई नेता यहां पर सुरक्षित नहीं है. उनके लिए कोई अधिकार नहीं बचे हैं, ना ही लोकतांत्रिक और ना ही मानवाधिकार. राज्यपाल ने कहा कि नियमों के मुताबिक, मैंने राज्य के हालात की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है.

जेपी नड्डा के काफिले पर हमले की निंदा
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए हमले को लेकर बंगाल के राज्यपाल ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए थे, ये लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है. लोकतंत्र में हर किसी को अपने विचारों को रखने का हक है.

गवर्नर बोले कि मुख्यमंत्री किस प्रकार लापरवाह हो सकता है, क्या बंगाली कल्चर इस तरह बात करने की इजाजत देता है. ममता बनर्जी वरिष्ठ नेता हैं, मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरा कार्यकाल पूरा कर रही हैं. ऐसे में अगर वो अपने शब्दों के लिए माफी मांगती हैं, तो अच्छा होगा.

‘मैं और मुख्यमंत्री संविधान से बंधे’ 
राज्यपाल ने कहा कि राजनीतिक दल क्या करते हैं, उससे मुझे मतलब नहीं है. लेकिन बतौर गर्वनर मेरी कुछ जिम्मेदारी हैं. संविधान की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है, कानून व्यवस्था का पालन करना, मानवाधिकार की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी है.

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी संविधान में बंधी हैं, उन्हें नियमों और कानून का पालन करना होगा. वो संविधान से अलग हटकर काम नहीं कर सकती हैं. बंगाल के राज्यपाल ने कहा कि सिर्फ कल की ही घटना नहीं बल्कि सिलीगुड़ी में भी इस तरह हुआ है, जहां पर गुंडों को राज्य सरकार द्वारा समर्थन दिया जा रहा है. कल ही मानवाधिकार दिवस था, लेकिन इस तरह की घटना हुई.

 

 

 

 

 

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शेयर बाजार में फिर बहार, सेंसेक्स-निफ्टी नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर 

शेयर बाजार में फिर बहार, सेंसेक्स-निफ्टी नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर 

बाॅम्बे स्टाॅक एक्सचेंज का सेंसेक्स 101 अंकों की तेजी के साथ 46,060.32 पर खुला. कारोबार के दौरान सेंसेक्स बढ़ते हुए 350 अंकों की तेजी के साथ 46,309.63 और निफ्टी बढ़ते हुए 13,579.35  तक पहुंच गया. 

हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शेयर बाजार में बहार लौट आया है. शुक्रवार को बाजार नए रिकाॅर्ड बनाता दिख रहा है. बाॅम्बे स्टाॅक एक्सचेंज का सेंसेक्स 101 अंकों की तेजी के साथ 46,060.32 पर खुला.

इसी तरह नेशनल स्टाॅक एक्सचेंज का निफ्टी 34 अंकों की तेजी के साथ 13,512.30 पर खुला. कारोबार के दौरान सेंसेक्स बढ़ते हुए 350 अंकों की तेजी के साथ 46,309.63 और निफ्टी बढ़ते हुए 13,579.35  तक पहुंच गया.

सभी सेक्टर हरे निशान में 

सभी सेक्टर के सूचकांक हरे निशान में दिख रहे हैं, बीएसई सेंसेक्स में बढ़ने वाले प्रमुख शेयरों में ओएनजीसी, एनटीपीसी, एसबीआई, बजाज फाइनेंस, एलऐंडटी शामिल हैं. करीब 1759 शेयरों में तेजी और 535 में गिरावट का रुख रहा.

गायत्री प्रोजेक्ट्स में अपर सर्किट 

गायत्री प्रोजेक्ट्स के शेयरों में 5 फीसदी का अपर सर्किट लगाना पड़ा है. असल में कंपनी को कई सरकारी प्रोजेक्ट में ऑर्डर मिले हैं, इसकी वजह से इसके शेयर चढ़ गये.

 सुबह 11.40 बजे सेंसेक्स का हाल 

Sensex

रुपया सपाट खुला

शुक्रवार को रुपया सपाट खुला है. डाॅलर के मुकाबले रुपया 73.66 पर खुला है. गुरुवार को रुपया 73.66 पर ही बंद हुआ था.

कल आयी थी गिरावट 

शेयर बाजार में गुरुवार को गिरावट का दौर रहा. बाॅम्बे स्टाॅक एक्सचेंज का सेंसेक्स 104 अंकों की गिरावट के साथ 45,999 पर खुला, जबकि नेशनल स्टाॅक एक्सचेंज का निफ्टी 41 अंकों की गिरावट के साथ 13,488 पर खुला.

किसान बिल पर अब फ्रंटफुट पर खेलेगी बीजेपी, देशभर में होंगी 700 चौपाल

किसान बिल पर अब फ्रंटफुट पर खेलेगी बीजेपी, देशभर में होंगी 700 चौपाल

कृषि कानून के मसले पर किसानों और विपक्ष के विरोध का सामना कर रही BJP अब फ्रंटफुट पर खेलने की तैयारी में है.. BJP शुक्रवार से देश के अलग-अलग शहरों में 700 प्रेस कॉन्फ्रेंस और चौपाल का आयोजन करेगी और कृषि कानून के फायदे गिनाएगी.

मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून के फायदों को गिनाया जाएगा और किसानों को इसके बारे में समझाया जाएगा. बीजेपी इस दौरान देश में सौ से अधिक जगहों पर किसान सम्मेलन भी करेगी, जबकि हर जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी.

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों का किसान पुरजोर विरोध कर रहे हैं. पिछले दो हफ्तों से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का डेरा है. केंद्र सरकार ने किसानों के साथ बात करने की कोशिश की, कानूनों में कुछ संशोधन भी सुझाए लेकिन बात नहीं बन सकी.

ऐसे में अब बीजेपी ने पार्टी स्तर पर कृषि कानूनों के मसले को जनता के सामने पेश करने का प्लान बनाया है. बता दें कि बीते दिन ही कृषि कानून पर एक बुकलेट जारी की गई थी, जिसमें तीनों कृषि कानूनों के फायदों को गिनाया गया था. इसके अलावा कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कृषि कानून के फायदे गिनाए थे और किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील की थी.

बीजेपी ने विपक्ष पर लगाया है आरोप

भारतीय जनता पार्टी ने लगातार कृषि कानून के मसले पर विपक्ष पर किसानों को भड़काने का आरोप लगाया है. बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष किसानों के कंधे पर बंदूक रख कर चला रहा है और बिचौलियों का पक्ष ले रहा है. बीजेपी का दावा है कि तीनों कानून किसानों के फायदे के हैं, अगर किसानों को कुछ शंकाएं हैं तो बातचीत से हल निकल सकता है.

हाल ही में राजस्थान के पंचायत चुनाव और देश के अन्य राज्यों में हुए कुछ चुनावों में मिली जीत के बाद बीजेपी की ओर से इसे कृषि कानून पर समर्थन के तौर पर पेश किया गया. बीते दिनों प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि राजस्थान में दो करोड़ से अधिक किसानों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मौकों पर आरोप लगाया है कि विपक्ष किसानों को भड़का रहा है. पीएम मोदी ने कहा है कि सरकार MSP खत्म नहीं करेगी, मंडी सिस्टमों में भी किसी तरह का बदलाव नहीं होगा. सरकार की ओर से भी किसानों को जो लिखित संशोधन दिए गए थे, उनमें इनका जिक्र किया गया था. हालांकि, किसानों ने सरकार के संशोधनों को मानने से इनकार किया और कानून रद्द करने की मांग पर अड़े रहे

 

कृषि मंत्री तोमर बोले- नए कानून किसान हित में, सरकार खुले मन से चर्चा को तैयार

कृषि मंत्री तोमर बोले- नए कानून किसान हित में, सरकार खुले मन से चर्चा को तैयार

कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसानों में गतिरोध जारी है. सरकार के प्रस्ताव को खारिज करते हुए किसानों ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी. किसानों के विरोध के बीच, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है, जिसमें उन्होंने किसानों से एक बार फिर प्रस्ताव पर विचार करने को कहा है. कृषि मंत्री ने ये भी कहा कि सरकार के पास ईगो नहीं है, हम खुले मन से बातचीत कर रहे हैं.

 

कोई कानून पूरा खराब या खरा नहीं होता: कृषि मंत्री

कृषि मंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि इन कानूनों के कारण एमएसपी प्रभावित नहीं होती. एमएसपी जारी रहेगी. कोई कानून पूरा खराब या खरा नहीं हो सकता, जिस प्रावधान पर दिक्कत है उस पर खुले मन से हम चर्चा करने को तैयार है. किसी भी समय किसान चर्चा करने के लिए आगे आएं, हम तैयार हैं. नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अगर किसानों को लगता है कि कोई बात हमारे प्रस्ताव में रह गई है तो भी और अगर हमारे प्रस्ताव की शब्दावली में कोई कमी रह गई है तो भी वो आगे आए, हम चर्चा को तैयार हैं. जब चर्चा चल रही हो तो आंदोलन के आगे चरण की घोषणा करना ठीक नहीं, अभी वार्ता चल ही रही है, चर्चा टूटी नहीं. उनको अपनी बातें वार्ता में करनी चाहिए थी. हम चर्चा को लेकर आशावान है.

 

सरकार के प्रस्ताव पर विचार करें किसान: नरेंद्र सिंह तोमर

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान संघों से आग्रह किया गया कि जो प्रस्ताव सरकार ने भेजा है, उस पर विचार कीजिए और जब भी आप कहेंगे हम चर्चा के लिए तैयार हैं. 2006 में स्वामीनाथन रिपोर्ट आई थी, लंबे समय तक इंतजार किया गया पर डेढ़ गुना एमएसपी लागू नहीं हुई. मोदी सरकार आने पर उन्होंने लागत मूल्य पर पचास प्रतिशत का मुनाफा देकर एमएसपी घोषित की, जिसका फायदा पूरे देश को मिल रहा है. उन्होंने आगे कहा कि हम लोगों को लगता था कि कानूनी प्लेटफॉर्म का फायदा लोग अच्छे से उठाएंगे. किसान महंगी फसलों की ओर आकर्षित होगा. नई तकनीक से जुड़ेगा. बुआई के समय ही उसको मुल्य की गारंटी मिल जाएगी.

 

किसानों से खुले मन से बातचीत कर रहे: कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कानून के वे प्रावधान जिन पर किसानों को आपत्ति है उन पर सरकार खुले मन से विचार करने पर सहमत है. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यह कानून वैद्य नहीं है. इस कानून से एमएसपी कहीं से भी प्रभावित नहीं होती है. हम लोगों ने प्रस्ताव दिया कि राज्य सरकार निजी मंडियों की व्यवस्था भी लागू कर सकती है. हमारे एक्ट में ये था कि पैन कार्ड से ही खरीद हो सकेगी. पैन कार्ड से खरीदी को लेकर किसानों के आशंका के समाधान के लिए भी हम राजी हुए. कृषि मंत्री ने कहा कि दूसरा उनका मुद्दा था कि आपने विवाद निपटाने के लिए एसडीएम को शामिल किया है. छोटा किसान होगा छोटे क्षेत्र का होगा तो जब वो न्यायालय जाएगा तो वहां समय लगेगा. हम लोगों ने इसके समाधान के लिए भी न्यायालय में जाने का विकल्प दिए.

 

 

कोरोना वैक्सीन वितरण का ब्लू प्रिंट तैयार, चुनाव आयोग की मदद ले सकती है सरकार

कोरोना वैक्सीन वितरण का ब्लू प्रिंट तैयार, चुनाव आयोग की मदद ले सकती है सरकार

भारत सरकार ने देश में कोरोना वैक्सीन वितरण पर काम शुरू कर दिया है. अभी से ही तैयारी की जा रही है, ताकि वैक्सीन आने पर वितरण तेजी से हो सके.

कोरोना वायरस को मात देने के लिए देश में कई वैक्सीन पर काम चल रहा है. सरकार को उम्मीद है कि अगले एक या दो महीने में वैक्सीन मिल सकती है. ऐसे में वैक्सीन वितरण को लेकर सरकार की ओर से लगातार तैयारियां चल रही हैं.

सूत्रों की मानें, तो सरकार वैक्सीन वितरण के लिए चुनाव आयोग की मदद ले सकती है ताकि देश के हर नागरिक की जानकारी सटीक मिल सिके.

वैक्सीन वितरण के लिए सरकार की ओर से बहुआयामी रणनीति को अपनाया जा सकता है. देश में अलग-अलग उम्र के लोगों को फेज के अनुसार, वैक्सीन दी जानी है. ऐसे में चुनाव आयोग के पास अधिकतर लोगों की उम्र की सटीक जानकारी है, जिनकी मदद सरकार वैक्सीन बांटने में ले सकती है.

इतना ही नहीं सरकार की ओर से बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की मदद ली जाएगी, ताकि घर-घर तक पहुंचा जा सके. नीति आयोग की ओर से एक विस्तृत प्रपोजल बनाया जा रहा है, जिसके तहत चुनाव आयोग से इस मसले पर चर्चा होगी और फिर आगे बढ़ा जाएगा.

आपको बता दें कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वैक्सीन वितरण पर चर्चा की थी, साथ ही सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई थी. पीएम मोदी ने राज्यों से अपील की थी कि वो अपने यहां कोल्ड स्टोरेज समेत अन्य तैयारियों पर काम शुरू कर दें, साथ ही अपनी-अपनी ओर से विस्तृत प्लान केंद्र को भेजें.

इसके अलावा सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी ने संकेत दिए थे कि कुछ हफ्तों में ही वैक्सीन आ सकती है. जिसे सबसे पहले बुजुर्गों, गंभीर बीमारी वाले लोगों और कोरोना वॉरियर्स को दिया जाएगा. उसके बाद अलग-अलग फेज़ में वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा.

MP में निकाय चुनाव की तैयारियां शुरू, कांग्रेस-बीजेपी के बीच होगा मुकाबला

MP में निकाय चुनाव की तैयारियां शुरू, कांग्रेस-बीजेपी के बीच होगा मुकाबला

मध्य प्रदेश की 16 नगर निगम के महापौर सीट, 99 नगर पालिका और 292 नगर परिषदों के अध्यक्ष पद के आरक्षण के लिस्ट बुधवार को जारी कर दी गई है. उपचुनाव की जंग फतह करने के बाद बीजेपी के हौसले बुलंद हैं, लेकिन कांग्रेस ने भी निकाय चुनाव की बाजी जीतने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं. हालांकि, अभी चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है. 

 

नगर निगम के महापौर का आरक्षण

प्रदेश के 16 नगर निगमों में महापौर पद के आरक्षण की सूची जारी हो गई है, जिनमें आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं. इंदौर और जबलपुर में महापौर का पद अनारक्षित रहेगा, यहां पर कोई भी चुनाव लड़ सकता है. भोपाल और खंडवा पिछड़े वर्ग की महिला, मुरैना एससी समुदाय की महिला और सागर, बुरहानपुर, ग्वालियर, देवास और कटनी में महापौर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं.

नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के लिए खाता खोलने की चुनौती है जबकि बीजेपी को शहरी इलाके में अपनी पकड़ को बनाए रखने का चैलेंज है. पिछले चुनाव में प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों में बीजेपी ने अपना कब्जा जमाया था. वहीं, 15 नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस का था जबकि एक सिंगरौली नगर निगम में बीएसपी का नेता प्रतिपक्ष था.

 

कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला

कमलनाथ ने सूबे के सभी 16 नगर निगम के लिए एक बार फिर से पार्षदों द्वारा ही चुनाव कराने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था, लेकिन शिवराज सरकार ने सत्ता में आते ही इस फैसले को बदल दिया है. इस तरह से अब महापौर के चुनाव प्रत्यक्ष होंगे, जिसे जीतने के लिए बीजेपी और कांग्रेस अपनी हरसंभव कोशिश करेंगी. ऐसे में माना जा रहा है कि जनवरी में चुनाव कराए जा सकते हैं, जिसे देखते हुए दोनों पार्टियां जोर-शोर से तैयारियों में जुटी हुई हैं.

 

नगर पालिका के आरक्षण

सामान्य वर्ग के लिए 53 नगर पालिका आरक्षित की गई हैं. इनमें सारंगपुर, सिवनी-मालवा, बेगमगंज, टीकमगढ़, नौगांव, पोरसा, अशोकनगर, डोंगर-परासिया, सीहोरा, कोतमा, पसान, सीधी, बड़नगर, गंजबासौदा, नरसिंहगढ़, सिहोर, पीथमपुर, बड़वाह, नरसिंहपुर, सेंधवा, गाडरवारा, अनूपपुर, आगर, शाजापुर, उमरिया, दमोह और खाचरोद.

सामान्य महिला के लिए आरक्षित – बैतूल, विदिशा, राजगढ़, पिपरिया, गढ़ाकोटा, पन्ना, खरगोन, बालाघाट, नैनपुर, धनपुरी, महिदपुर, शिवपुरी, बैरसिया, मुलताई, देवरी, दतिया, गुना, वारासिवनी, चौरई, सौसर, अमरवाड़ा, करेली, नीमच, अंबाह, मंडीदीप, शुजालपुर.

 

ओबीसी के लिए आरक्षित

ओबीसी वर्ग के लिए भी कई नगर पालिका आरक्षित की गई है. इसमें से सबलगढ़, धारा, आष्टा, रायसेन, सिरोंज, होशंगाबाद, छतरपुर, शहडोल, पन्ना, राधौगढ़, मंदसौर, जुन्नारदेव, मनावर, मैहर, सनावद, श्योपुर कलां, सिवनी, मंडला, ब्यावरा, रहली, पाढूंर्णा, इटारसी, जावरा और नेपानगर नगर पालिका ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई है.

शादी में फैला कोरोना, दूल्हे की मौत, दुल्हन सहित 9 लोग पॉजिटिव

शादी में फैला कोरोना, दूल्हे की मौत, दुल्हन सहित 9 लोग पॉजिटिव

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से ऐसा मामला सामने आया है जहां एक परिवार के नौ लोग कोरोनावायरस संक्रमित पाए गए हैं. संक्रमितों में दुल्हन भी शामिल है. संक्रमण के शिकार लोगों का इलाज चल रहा है. दोनों की 10 दिन पहले शादी हुई थी और शादी के बाद चार दिसंबर को दूल्हे की मौत हो गई थी.

दरअसल, चार दिसंबर को दूल्हे की मौत हुई थी तो दूल्हे को बुखार और सांस लेने में दिक्कत थी, लेकिन उसका कोरोना टेस्ट नहीं कराया गया था. इसके बाद शंका होने पर परिवार की कोरोना जांच कराई गई तो नौ लोग संक्रमित निकले. 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीता कुलश्रेष्ठ ने बताया कि युवक की 25 नवंबर को शादी हुई थी. शादी के तुरंत बाद युवक का स्वास्थ्य बिगड़ गया और चार दिसंबर को उसकी मौत हो गई है. कोरोना टेस्ट में दुल्हन समेत 9 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. इसमें दुल्हन की सास भी शामिल है. फिलहाल सभी का इलाज चल रहा है.