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किसानों का आंदोलन तेज, दिल्ली-नोएडा बॉर्डर किया ब्लॉक

किसानों का आंदोलन तेज, दिल्ली-नोएडा बॉर्डर किया ब्लॉक

कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन को 20 दिन से अधिक हो गए हैं. बुधवार को एक बार फिर दिल्ली-नोएडा बॉर्डर को ब्लॉक कर दिया गया. किसान संगठनों ने सरकार को लिखित में जवाब देते हुए संशोधनों को ठुकरा दिया है. आज ही सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई भी होनी है.

दिल्ली-नोएडा बॉर्डर फिर बंद

किसानों ने एक बार फिर दिल्ली और नोएडा सीमा को बंद कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई से पहले किसानों ने अपने आंदोलन को धार दी है. कुछ दिन पहले नोएडा सीमा को खोला गया था, लेकिन अब दूसरे संगठन ने यहां मोर्चा संभाला है.

सिद्धू ने उठाया इंश्योरेंस का मुद्दा

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर कृषि कानूनों के मसले पर सरकार पर निशाना साधा है. नवजोत सिद्धू ने वीडियो ट्वीट कर कहा कि इंश्योरेंस के नाम पर किसानों को लूटने का काम हो रहा है और कंपनियों को सीधा फायदा हो रहा है. पहले जब सरकारी कंपनी इंश्योरेंस करती थी, तबतक किसान को फायदा होता था.

सरकार को किसान संगठनों का लिखित जवाब- संशोधन स्वीकार नहीं

बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से सरकार को लिखित में जवाब दिया गया है. किसान मोर्चा ने सरकार से अपील की है कि वो उनके आंदोलन को बदनाम ना करें और अगर बात करनी है तो सभी किसानों से एक साथ बात करें.

सनी देओल को मिली Y श्रेणी की सुरक्षा

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारतीय जनता पार्टी के सांसद और अभिनेता सनी देओल की सुरक्षा बढ़ाई है. सनी देओल को वाई श्रेणी की सुरक्षा दी गई है, यानी अब उनके साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की टीम मौजूद रहेगी.

गतिरोध जारी, पीएम ने की अपील

किसानों और सरकार के बीच में गतिरोध जारी है. किसान संगठन पीछे नहीं हट रहे हैं और सरकार के सामने अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. किसान आंदोलन को धार दे रहे हैं, अन्य राज्यों से भी दिल्ली किसान कूच कर रहे हैं. बुधवार को किसानों ने दिल्ली-नोएडा का चिल्ला बॉर्डर बंद करने की बात कही है.

दूसरी ओर पीएम मोदी ने एक बार फिर कृषि कानूनों को किसानों के लिए हितकारी बताया है. पीएम मोदी ने कहा है कि विपक्ष किसानों को डरा रहा है और भड़काने की कोशिश कर रहा है.

किसान आंदोलन पर सुप्रीम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को किसान आंदोलन से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी है. इनमें दिल्ली की सीमाओं पर भीड़ इकट्ठा करने, कोरोना वायरस के संकट को लेकर याचिका लगाई गई है. इसके अलावा किसान आंदोलन में मानवाधिकारों, पुलिस एक्शन और किसानों की मांग मानने की अपील की गई है. चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच सुनवाई करेगी.

 

बंगाल: TMC में हलचल बढ़ी, MLA पद से इस्तीफा दे सकते हैं शुभेंदु अधिकारी

बंगाल: TMC में हलचल बढ़ी, MLA पद से इस्तीफा दे सकते हैं शुभेंदु अधिकारी

बंगाल में चुनाव से पहले टीएमसी को फिर झटका लग सकता है. मंत्री पद छोड़ने वाले शुभेंदु अधिकारी आज विधायक पद त्याग सकते हैं, उनके अलावा एक अन्य TMC विधायक ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं.

पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल बढ़ने लगी है. राज्य में भारतीय जनता पार्टी की चुनौती का सामना कर रही तृणमूल कांग्रेस को अब घर में विरोध का सामना करना पड़ रहा है. बीते दिनों मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले TMC नेता शुभेंदु अधिकारी आज विधायक पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं.

सोमवार सुबह शुभेंदु अधिकारी मिदनापुर से कोलकाता के लिए रवाना हुए, जहां कयास लगाए जा रहे हैं कि वो अपना पद त्याग सकते हैं. गौरतलब है कि लंबे वक्त से ये अटकलें हैं कि शुभेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं, यही कारण है कि पहले उन्होंने मंत्री पद त्यागा और फिर अब विधायक पद से इस्तीफा देने के कयास हैं.

शुभेंदु अधिकारी की गिनती टीएमसी के उन नेताओं में की जाती है, जो अपने क्षेत्र के साथ-साथ पार्टी संगठन पर कड़ी पकड़ रखते हैं. हालांकि, टीएमसी प्रमुख और बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने बार-बार कहा है कि बीजेपी कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन वो बंगाल में जीत हासिल नहीं कर पाएगी.

शुभेंदु अधिकारी के अलावा टीएमसी के एक और विधायक ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं. टीएमसी विधायक जितेंद्र तिवारी ने राज्य सरकार के मंत्री फिरहाद हाकिम को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें कहा है कि उनके क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है.

टीएमसी विधायक ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि शहरी विकास मंत्रालय उनके आसनसोल को स्मार्ट सिटी बनाने में फेल हुआ है. बता दें कि जिन विधायक जितेंद्र तिवारी ने ये चिट्ठी लिखी है, उनके साथ हाल ही में कुछ अन्य नेताओं ने टीएमसी सरकार के पदों से इस्तीफा दिया था.

बीजेपी लगातार बंगाल में अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगी है और टीएमसी में सेंध लगा रही है. बीते दिनों बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बंगाल का दौरा किया था और जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह भी दो दिवसीय दौरे पर बंगाल जाएंगे.

Gmail, Youtube समेत Google के कई ऐप हुए डाउन, Twitter पर करने लगा ट्रेंड

Gmail, Youtube समेत Google के कई ऐप हुए डाउन, Twitter पर करने लगा ट्रेंड

सोमवार शाम अचानक यू-ट्यूब और जीमेल सहित गूगल के तमाम ऐप्स ने काम करना बंद कर दिया. जिसके बाद ट्विटर पर गूगल डाउन ट्रेंड करने लगा. कई लोगों ने गूगल के ऐप्स डाउन होने की शिकायत ट्वीट की है.

सोमवार शाम अचानक यू-ट्यूब और जी-मेल सहित गूगल के तमाम ऐप्स ने काम करना बंद कर दिया. जिसके बाद ट्विटर पर गूगल डाउन ट्रेंड करने लगा. कई लोगों ने गूगल के ऐप्स डाउन होने की शिकायत ट्वीट की है.

आपको बता दें कि भारत में सिर्फ यू-ट्यूब और जी-मेल ही नहीं बल्कि गूगल ड्राइव, हैंगआउट, गूगल मीट जैसे कई जरूरी ऐप्स की सेवा बाधित रहे. लोग लगातार गूगल डाउन हैशटैग के साथ ये जानकारी शेयर कर रहे हैं. इसी वजह से गूगल डाउन और यूट्यूब डाउन हैशटैग ट्विटर पर लगातार ट्रेंड कर रहे हैं.

गूगल की इन सेवाओं के बाधित होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. हालांकि इस दौरान गूगल सर्च इंजन (google.com) लगातार काम कर रहा था. लोग कयास लगा रहे हैं कि शायद सर्वर डाउन होने से गूगल के ऐप्स में यह दिक्कत आई है

 

इस बीच यू-ट्यूब टीम की तरफ से आधिकारिक बयान आया है. टीम यू-ट्यूब नाम के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया है, “हम जानते हैं कि आप में से कई अभी यू-ट्यूब एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं – हमारी टीम अवेयर है और इस पर काम कर रही है. जैसे ही हमारे पास और खबर आएगी हम आपको यहां अपडेट करेंगे.”

 

भूख हड़ताल पर बैठे किसानों का आम लोगों के लिए माफीनामा- हक के लिए धरना, मजबूरी समझें

भूख हड़ताल पर बैठे किसानों का आम लोगों के लिए माफीनामा- हक के लिए धरना, मजबूरी समझें

कृषि कानून को लेकर अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए बैठे किसानों ने आम लोगों से माफी मांगी है. एक माफीनामा जारी कर लोगों को हो रही परेशानी के लिए माफी मांगी गई है, साथ ही जरूरतमंदों की मदद का भरोसा दिया गया है.

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को अब दो हफ्ते से अधिक हो गया है. कड़ाके की ठंड में भी किसान डटे हुए हैं, लेकिन इस धरने के कारण आम लोगों को कुछ परेशानी भी हो रही है. अब इसी परेशानी को देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने एक माफीनामा निकाला है, जिसमें उन्होंने आम लोगों को हो रही दिक्कतों के लिए खेद जताया है. हालांकि, ये भरोसा भी दिया है कि अगर किसी मरीज या जरूरतमंद को कोई परेशानी होगी, तो तुरंत हमसे संपर्क करें.

गौरतलब है कि संयुक्त किसान मोर्चा के जरिये देश के कई किसान संगठन नए किसान बिल को लेकर धरना दे रहे हैं. दिल्ली का सिंघु बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और अब राजस्थान से हरियाणा को जोड़ने वाला बॉर्डर बंद पड़ा हुआ है. 

किसानों द्वारा निकाले गए पर्चे में लिखा गया है, “हम किसान हैं, लोग हमें अन्नदाता कहते हैं. प्रधानमंत्री कहते हैं वह हमारे लिए 3 कानून की सौगात लेकर आए हैं, हम कहते हैं ये सौगात नहीं सजा है. हमें सौगात देनी है तो फसल का उचित मूल्य देने की कानूनी गारंटी दें.”

इसमें आगे लिखा गया है, “सड़क बंद करना, जनता को तकलीफ देना हमारा कोई उद्देश्य नहीं है, हम तो मजबूरी में यहां बैठे हैं. फिर भी हमारे इस आंदोलन से आपको जो तकलीफ हो रही है उसके लिए आपसे हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं.”

साथ ही किसानों ने भरोसा दिलाया है, “अगर किसी भी बीमार या बुजुर्ग को दिक्कत हो, एम्बुलेंस रुकी हो या और कोई इमरजेंसी हो तो कृपा हमारे वॉलिंटियर से सम्पर्क करें वो आपकी तुरंत मदद करेंगे. मैं एक किसान.”

गौरतलब है कि किसानों के आंदोलन के कारण कई रास्ते बंद हैं, कई जगह डायवर्जन है और जाम लगता है. हालांकि, ऐसा कई बार देखने को आया है कि किसान एम्बुलेंस के लिए खुद ही रास्ता बना रहे हैं. इसके अलावा किसानों के द्वारा जो लंगर तैयार किया जा रहा है, उसमें सिर्फ प्रदर्शनकारियों को ही नहीं बल्कि अन्य आम लोगों को भी प्रसाद दिया जा रहा है.

किसानों की ओर से इससे पहले भी बयान दिया गया है कि वो किसी को परेशानी पहुंचाने के लिए नहीं बैठे हैं, सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं. अगर सरकार हमारी बातों को मान लेती है, तो शाम तक सभी रास्तों को खाली कर हम अपने घर वापस चले जाएंगे. हालांकि, किसान इस बात पर भी अड़े हैं कि जबतक उनकी मांगें नहीं मानी जाती है तो वो हिलेंगे नहीं, चाहे कितना भी वक्त लग जाए.

TMC विधायक ने अपनी ही सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, केंद्र के फंड को खर्च न करने का आरोप

TMC विधायक ने अपनी ही सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, केंद्र के फंड को खर्च न करने का आरोप

तृणमूल पार्टी के विधायक जितेंद्र तिवारी ने बंगाल राज्य शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम को पत्र लिखकर क्षेत्र में विकास कार्य न करने का आरोप लगाया है कि मंत्री दुर्गापुर और आसनसोल को स्मार्ट सिटी में बदलने में विफल रहे हैं, इलाके में कोई भी विकास नहीं हुआ है,

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में सबकुछ सही नहीं चल रहा है. पार्टी के नेताओं ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है. अब तृणमूल पार्टी के नेता और पंडेश्वर से विधायक जितेंद्र तिवारी ने ममता सरकार में शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम को पत्र लिखकर क्षेत्र में विकास कार्य न करने का आरोप लगाया है.

विधायक जितेन्द्र तिवारी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि मंत्री दुर्गापुर और आसनसोल को स्मार्ट सिटी में बदलने में विफल रहे हैं और इलाके के लोगों के लिए कोई भी विकास नहीं हुआ है.

तिवारी ने अपने पत्र में लिखा है, ”मैंने आसनसोल में जन्म लिया और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में बड़ा हुआ हूं. शहर के एक अध्यक्ष महापौर और प्रशासक के रूप में शहरी और स्थानीय निकाय में अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है, लेकिन मुझे आपको यह बताते हुए बहुत पीड़ा हो रही है कि हमारे शहर को भारत सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी मिशन परियोजना के तहत शहरी विकास के लिए दस शहरों में चुना गया. जिससे हमारे शहर को 2000 करोड़ की राशि प्राप्त करने की अनुमति मिली. जो हमारे शहर के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकते थे. लेकिन किन्हीं राजनितिक कारणों से हमारे शहर आसनसोल को कोई फायदा नहीं मिल सका.”

टीएमसी विधायक ने अपने चिट्ठी में आगे शिकायती भरे अंदाज में लिखा, ”मुझे वादा किया जाता रहा कि शहर के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा धन उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसी तरह, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के तहत आसनसोल सिटी को केंद्र सरकार से 1500 करोड़ रुपये का फंड मिल सकता था, जैसा कि देश के बाकी जिलों को मिले हैं लेकिन आप और आपके विभाग ने हमें केंद्र सरकार द्वारा मिलने वाले लाभों को प्राप्त नहीं होने दिया, जिससे मुझे महसूस होता है कि आसनसोल शहर के साथ अन्याय हुआ है.”

कोरोना वैक्सीन लगने के बाद हो सकते हैं ये 5 साइड इफेक्ट!!!

Coronavirus: कोरोना वैक्सीन लगने के बाद हो सकते हैं ये 5 साइड इफेक्ट, डॉक्टर्स कर रहे आगाह

कोरोना की वैक्सीन लगने के बाद एलेर्जी या खतरनाक साइड इफेक्ट का खतरा बढ़ सकता है. कई लीडिंग वैक्सीन ट्रायल के साथ बतौर वॉलंटियर्स जुड़े कुछ लोगों में इस तरह के साइड इफेक्ट देखे जा चुके हैं. कुछ मामलों में तो बेहद अनोखे साइड इफेक्ट भी देखे गए हैं. इस वैक्सीनेशन प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए हमें इसकी खामियों पर ध्यान देना होगा. हमें इनसे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा. आइए आज आपको पोस्ट वैक्सीनेशन के कुछ ऐसे ही साइड इफेक्ट्स के बारे में बताते हैं, जिन्हें लेकर डॉक्टर्स ज्यादा चिंतित हैं.

 

बुखार या ठंड लगना- मॉडर्ना की वैक्सीन लगने के बाद एक वॉलंटियर में बुखार और बहुत ज्यादा ठंड लगने जैसे साइड इफेक्ट सामने आए थे. वैक्सीन लगने के कुछ घंटे बाद ही इस शख्स का बुखार 102 डिग्री टेंपरेचर पर था. इसलिए वैक्सीन निर्माता कंपनियों को इन दो साइड इफेक्ट्स पर विशेष रूप से ध्यान देना होगा. हालांकि, कई बार जब शरीर एंटीबॉडी बनाता है तो इंसान को हल्का या तेज बुखार हो सकता है.

सिरदर्द– वैक्सीन लगने बाद सिरदर्द होने की समस्या भी एक ऐसा लक्षण है, जिसके लिए हमें तैयार रहना होगा. वैक्सीन लगने के बाद रोगी को तेज सिरदर्द की समस्या हो सकती है. इसके अलावा मानसिक तनाव, चिढ़चिढ़ापन और मूड स्विंग जैसी परेशानियां भी आपको घेर सकती हैं. किसी भी तरह के इंफेक्शन में 50 प्रतिशत मरीज वैक्सीन लगने के बाद इस परेशानी से जूझते हैं.

 

उल्टी या जी मिचलाना– किसी वैक्सीन का असर इंसान के गैस्ट्रोइंटसटाइनल सिस्टम पर पड़ सकता है. एक वॉलंटियर जिसे मई में मॉडर्ना की सर्वाधिक डोज़ लेने के लिए चुना गया था, वैक्सीन शॉट लगने के बाद कई घंटों तक उसकी तबियत बिगड़ी रही थी. इस बीच वॉलंटियर ने उल्टी, जी मिचलाना, घबराहट और पेट में ऐंठन जैसे लक्षण महसूस किए थे.

 

मांसपेशियों में दर्द- जिस जगह पर मरीज को वैक्सीन का इंजेक्शन दिया जाता है, वहां अक्सर मांसपेशियों में दर्द और सूजन की दिक्कत होती है. इम्यून की प्रतिक्रिया पर उस हिस्से में रेडनेस या रैशेज़ की समस्या भी हो सकती है. मॉडर्ना, फाइजर और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजेनेका तीनों ही अपने वैक्सीन में इस तरह के साइड इफेक्ट दर्ज कर चुके हैं.

 

माइग्रेन– सिर में एक तरफ दर्द या माइग्रेन भी एक अनोखी समस्या हो सकती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, फाइजर के वैक्सीन ट्रायल का हिस्सा रही एक वॉलंटियर में वैक्सीन लगने के बाद माइग्रेन का तेज दर्ज देखा गया था. उस वॉलंटियर ने कई और लोगों से ये कहा था कि इस वैक्सीन को लेने से एक दिन पहले छुट्टी ले लें और खूब आराम करें. ये वैक्सीन इंसान में माइग्रेन अटैक को ट्रिगर कर सकती है.

 

घटिया प्लाज्मा चढ़ाने से कोरोना संक्रमित मरीज की मौत, पोस्टमॉर्टम में हुआ खुलासा

घटिया प्लाज्मा चढ़ाने से कोरोना संक्रमित मरीज की मौत, पोस्टमॉर्टम में हुआ खुलासा

ग्वालियर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां घटिया प्लाज्मा चढ़ाने से मरीज की मौत हो गई. मामला सामने आते ही क्राइम ब्रांच, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ब्लड बैंकों पर कार्रवाई करने में जुट गई. इस मामले को लेकर घटिया प्लाज्मा चढ़ाने वाले हॉस्पिटल रोड स्थित राधास्वामी ब्लड बैंक की जांच पड़ताल की जा रही है. जांच में कई दस्तावेजों में कमी पाई गई. 

प्लाज्मा कांड का मुख्य आरोपी जयारोग्य अस्पताल(जेएएच) के लैब अटेंडर मनीष त्यागी का भाई अजय त्यागी पाया गया है. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. पड़ाव थाना पुलिस ने पीएम रिपोर्ट मिलने के बाद अजय त्यागी सहित तीन लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. वहीं, दो अन्य आरोपी पहले से ही पुलिस की हिरासत में हैं. उनके नाम जगदीश व महेंद्र बताए गए हैं.

अब क्राइम ब्रांच की टीम अजय त्यागी से प्लाज्मा कांड के संबंध में पूछताछ कर रही है. इस रैकेट में रेडक्रास से जुड़े कई लोगों के नाम सामने आ सकते हैं. पुलिस ने संदेह के आधार पर रेडक्रास से जुड़े लगभग 8 से 10 लोगों से पूछताछ के लिए उनके घरों पर दबिश भी दी है. उल्लेखनीय है कि अपोलो अस्पताल में प्लाज्मा चढ़ाने के दौरान दतिया के कारोबारी मनोज गुप्ता की तबीयत बिगड़ने के बाद 10 दिसंबर को मौत हो गई थी. इसके बाद मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया था कि प्लाज्मा उन्होंने 18 हजार में जेएएच से खरीदा था. उनके हंगामे के बाद प्लाज्मा की जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी.

प्लाज्मा की जांच और मृतक का शॉर्ट पोस्टमॉर्टम किया गया. खुलासा हुआ कि जान गंवाने वाले कोरोना संक्रमित व्यापारी मनोज गुप्ता को घटिया प्लाज्मा चढ़ाया गया था. गिरोह में 5 लोगों के नाम सामने आये हैं, लेकिन शेष के खिलाफ सबूत जुटाये जा रहे हैं. शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत व्यापारी के खून में संक्रमण मिला है. यह संक्रमण प्लाज्मा चढ़ाने के बाद फैला था. इसकी पड़ताल के लिए बिसरा की जांच कराई जा रही है. इसी गैंग ने कोरोना संक्रमित व्यापारी के परिजनों को जेएएच की फर्जी रसीद थमाकर 18 हजार रूपये में प्लाज्मा बेचा था. इसे चढ़ाने के 2 दिन बाद मरीज की मौत हो गई थी.

कोरोना संक्रमित मरीजों के परिजनों से गिरोह यह कहकर पैसा वसूलता था कि प्लाज्मा जेएएच से दिलवा रहे हैं. वह जेएएच की फर्जी रसीद भी देते थे ताकि मरीज के परिजनों को विश्वास हो जाये. पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि यह लोग प्लाज्मा कहां से लाते थे.

वहीं, इस मामले को लेकर एएसपी सत्येन्द्र सिंह तोमर ने बताया जो प्लाज्मा मरीज को चढ़ाया गया वह अमानक है.

सेना के पास अब 15 दिन का युद्ध लड़ने लायक गोला-बारूद !!

सेना के पास अब 15 दिन का युद्ध लड़ने लायक गोला-बारूद !!

कुछ साल पहले तक भारत की सेना 40 दिन के लिए युद्ध की तैयारी रखती थी. लेकिन हथियारों और गोला-बारूद के साथ-साथ युद्ध के बदलते स्वरूप के कारण इसे 10​ दिन के स्तर तक लाया गया था.

इंडियन आर्मी अब 15 दिनों के सघन युद्ध की तैयारी कर रही है (फाइल फोटो-रॉयटर्स)

भारत की सेना अब घनघोर युद्ध की स्थिति में लड़ाई के लिए 15 दिन तक का गोला-बारूद संग्रह कर रख सकती है. पहले ये सीमा 10 दिन की थी, लेकिन सीमा पर हालात देखते हुए, लद्दाख में चीन से तनाव के बीच भारतीय सेना ने अब युद्ध की तैयारी को बढ़ा दिया है. भारतीय सेना दो मुहाने पर युद्ध की तैयारी काफी समय से कर रही थी, लेकिन अब सेना को इस पर गंभीरता से तैयारी करने को कहा गया है और 15 दिन की सघन लड़ाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है.

टू फ्रंट वार की तैयारी

युद्धक सामानों के ज्यादा स्टोरेज से सेना को अपना रिजर्व बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा टू फ्रंट वार की स्थिति में गोला बारूद की जरूरतों में सामंजस्य बिठाने में मदद मिलेगी, बता दें कि मौजूद हालात में देश के दोनों फ्रंट बराबर रूप से सक्रिय हो गए हैं.

पहले 10 दिन की तैयारी रखती थी सेन

टॉप सरकारी सूत्रों ने बताया कि सेना को हथियारों और गोला बारूद के संग्रह को बढ़ाकर अब 15 दिन तक कर दिया गया है. इसका मतलब ये है कि अब सेना को 15 दिन के सघन युद्ध की तैयारी की स्थिति में रहना है. पहले ये तैयारी 10 दिन की होती थी.

सेना की वित्तीय शक्ति में इजाफा

इस मंजूरी से सेना की वित्तीय शक्ति में भी बढ़ोतरी हुई है. अब सेना बजट के अंदर हर खरीद के लिए 500 करोड़ रुपये खर्च कर सकती है. सूत्रों ने बताया कि युद्ध के साजो-सामान संग्रह करने में बढ़ोतरी की इजाजत कुछ दिन पहले मिली है.

पहले 40 दिन की होती थी युद्ध तैयारी

बता दें कि कुछ साल पहले तक सेना 40 दिन के लिए युद्ध की तैयारी रखती थी. लेकिन हथियारों और गोला-बारूद के साथ-साथ युद्ध के बदलते स्वरूप के कारण इसे 10​ दिन के स्तर तक लाया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक 40 दिन तक गोला बारूद की स्टोरेज में समस्या इसकी मुख्य वजह थी. अब ​सुरक्षा बलों के लिए इसे बढ़ाकर 15 दिन करने की मंजूरी दे दी गई है.

उरी हमले के बाद सेना को एहसास हुई कमी

बता दें कि उरी हमले के बाद ये महसूस किया गया था कि सेना का युद्ध भंडार कम है. इसके बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के वाइस चीफ की वित्तीय शक्ति को 100 करोड़ से बढ़ाकर 500 करोड़ कर दिया था.

इसके अलावा सरकार ने इन तीनों सेनारी कओं को 300 करोड़ रुपये की आपात खरीद करने की शक्ति दी थी. इस शक्ति का इस्तेमाल तब किया जा सकता था जब सेना के इन अंगों को लगता कि युद्ध लड़ने के लिए इन हथियारों या सामानों का होना जरूरी है. बता दें कि पाकिस्तान और चीन की ओर से किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए हथियारों, मिसाइलों और जरूरत की कई दूसरे चीजों की खरीदार रही है.

एक रुपये किलो बिक रही थी गोभी, किसान ने तैयार फसल पर चला दिया ट्रैक्टर

एक रुपये किलो बिक रही थी गोभी, किसान ने तैयार फसल पर चला दिया ट्रैक्टर

समस्तीपुर जिले के मुक्तापुर के किसान ओम प्रकाश यादव का कहना है कि गोभी की खेती में चार हजार रुपये प्रति कट्ठा का खर्च है और यहां मंडी में एक रुपये किलो भी नहीं बिक रहा है.

देश में नए कृषि कानूनों के खिलाफ 18 दिन से प्रदर्शन चल रहा है, वहीं बिहार के समस्तीपुर में गोभी का उचित मूल्य नहीं मिलने से एक किसान इतना टूट गया कि उसने लहलहाती फसल पर ट्रैक्टर चला दी.

समस्तीपुर जिले के मुक्तापुर के किसान ओम प्रकाश यादव का कहना है कि गोभी की खेती में चार हजार रुपये प्रति कट्ठा का खर्च है और यहां मंडी में एक रुपये किलो भी नहीं बिक रहा है. अपनी पीड़ा बताते हुए ओम प्रकाश यादव ने कहा कि पहले तो गोभी को मजदूर से कटवाना पड़ता है, फिर बोरा देकर पैक करवाना होता है और ठेले से मंडी पहुंचाना पड़ता है, लेकिन वहां आढ़तिए एक रुपये प्रति किलो भी गोभी की फसल खरीदने को तैयार नहीं है. मजबूरन उसे अपनी फसल पर ट्रैक्टर चलवाना पड़ रहा है.

किसान ने कहा कि दूसरी बार उसकी फसल बर्बाद हुई है, इससे पहले भी उसकी फसल को कोई खरीदने वाला नहीं था.

ओम प्रकाश यादव ने कहा कि अब वे इस जमीन पर गेंहू रोपेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार से एक रुपया लाभ नहीं मिल रहा है. इससे पहले उनका काफी गेहूं खराब हो गया था तो सरकार से एक हजार 90 रुपया का मुआवजा मिला था. इस किसान ने कहा कि वह 8 से 10 बीघे में खेती करते हैं और सरकार की ओर से एक हजार रुपया क्षतिपूर्ति मिलता है.

यहां के किसानों का कहना है कि जितने रुपये खर्च कर के वो गोभी को मंडी लेकर जाएंगे वहां पर उसका मूल धन भी वापस नहीं होने वाला है. लिहाजा फसल को खेत में ही नष्ट कर देना सही है. खेत में ट्रैक्टर चलाते देखकर आस-पास के लोग खेत पहुंच गए और खेत से गोभी उठाकर घर ले गए. अपनी फसल की कीमत न पाने वाला किसान फिलहाल लोगों को अपनी गोभी ले जाता देखकर ही संतुष्ट था. इस किसान ने कहा कि ये सब गांव के लोग और मजदूर हैं, सब्जी खाकर खुश होंगे.

बंगाल में पत्थरबाजी का इफेक्ट, विजयवर्गीय को मिली Z सिक्योरिटी-बुलेट प्रूफ गाड़ी

बंगाल में पत्थरबाजी का इफेक्ट, विजयवर्गीय को मिली Z सिक्योरिटी-बुलेट प्रूफ गाड़ी

पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी दंगल के बीच बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की सुरक्षा बढ़ाई गई है, अब उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा मिलेगी. हाल ही में बंगाल में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था, तब कैलाश विजयवर्गीय भी को चोट आई थी.

भारतीय जनता पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की सुरक्षा में इजाफा किया गया है. बीते दिनों पश्चिम बंगाल में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था, साथ ही कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी पर भी पत्थर फेंके गए थे जिसमें उन्हें चोट आई थी.

इसी हमले के बाद अब कैलाश विजयवर्गीय की सुरक्षा बढ़ाकर Z श्रेणी की कर दी गई है. कैलाश विजयवर्गीय को बुलेट प्रूफ गाड़ी दी मिलेगी.

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में बीते दिनों जब जेपी नड्डा अपने दौरे पर गए थे, तब उनके काफिले पर हमला किया गया था. इस हमले में जेपी नड्डा सुरक्षित रहे थे, लेकिन उनकी गाड़ियों पर पत्थर फेंके गए थे.

इसी दिन कैलाश विजयवर्गीय के काफिले पर भी हमला हुआ था, जिसमें उनके हाथ पर चोट आई थी. कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए बीजेपी के प्रभारी हैं और लगातार बंगाल में पार्टी की ओर से मोर्चा संभाले हुए हैं.

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है और उससे पहले बीजेपी लगातार अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगी है. बीते दिनों जब जेपी नड्डा और कैलाश विजयवर्गीय के काफिले पर हमला हुआ, तो बीजेपी ने इसका आरोप टीएमसी पर लगाया और ममता सरकार पर जमकर हमला बोला.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई बड़े मंत्रियों ने ममता सरकार की आलोचना की. राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी इस घटना पर गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी थी.

बीजेपी और टीएमसी में बढ़ रहे टकराव के बीच गृह मंत्री अमित शाह फिर बंगाल का दौरा करेंगे. 19-20 दिसंबर को बीजेपी नेता अमित शाह बंगाल दौरे पर रहेंगे और चुनावी तैयारियों का जायजा लेंगे.